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इस सर्दी ये टॉप 4 ट्रेंडिंग शॉल्स, जो आपको देंगे किलर विंटर लुक!

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सर्दियों का मौसम शुरू होते ही देशभर में शॉल की डिमांड बढ़ जाती है. चाहे पुरुष हों या महिलाएं, हर कोई अपनी सुविधा और स्टाइल के हिसाब से शॉल ओढ़ना पसंद करता है. शॉल न केवल आपके विंटर लुक को ग्रेसफुल बनाती है बल्कि ठंड से सुरक्षा भी देती है. मार्केट में आजकल शॉल की अनगिनत वैरायटी, पैटर्न और कलर ऑप्शन उपलब्ध हैं.

अक्सर लोग मान लेते हैं कि सिर्फ पश्मीना शॉल ही सबसे गर्म होती है, जबकि सच्चाई यह है कि भारत में ऐसी कई पारंपरिक शॉलें मौजूद हैं जो बेहद हल्की, मुलायम और पतली होने के बावजूद गजब की गर्माहट देती हैं. इस रिपोर्ट में जानिए ऐसी 5 देसी शॉलों के बारे में, जिन्हें आप इस सर्दी जरूर ट्राई कर सकते हैं.

 याक वूल शॉल

पश्मीना की तरह ही याक वूल शॉल भी बेहद गर्म मानी जाती है. यह इतनी गर्म होती है कि इसे माइनस तापमान वाले इलाकों में भी आराम से पहना जा सकता है. याक के ऊन से बनी यह शॉल टिकाऊ, हल्की और इको-फ्रेंडली होती है. इसके डिजाइन में ट्राइबल पैटर्न, लोकल मोटिफ और बोल्ड टेक्सचर शामिल होते हैं. भारत में याक वूल शॉल मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में बनाई जाती है. ये शॉल थोड़ी मोटी होती हैं, इसलिए इन्हें ओढ़ने पर जैकेट जैसी गर्माहट मिलती है.

 कुल्लू शॉल

हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत कुल्लू शॉल अपने पारंपरिक पैटर्न और गर्माहट के लिए जानी जाती है. यह बेहद सॉफ्ट होती है और इतना हल्का एहसास देती है कि जैसे कुछ ओढ़ा ही न हो. डेली वियर के लिए यह एक परफेक्ट विकल्प है. सबसे खास बात यह बात है कि कुल्लू शॉल बजट फ्रेंडली होती है, इसलिए हर कोई इसे अपनी वार्डरोब में शामिल कर सकता है.

अंगोरा वूल शॉल

अंगोरा वूल शॉल मुलायम, गर्म और देखने में बहुत एलिगेंट होती है. इसे पहनने पर ऐसा लगता है जैसे रूई की हल्की परत को ओढ़ लिया हो. अंगोरा ऊन खरगोश के नरम बालों से तैयार किया जाता है, और इसका उत्पादन हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बड़े स्तर पर होता है. ये शॉल गर्माहट देने के बावजूद बिल्कुल भी भारी महसूस नहीं होती.

 मेरिनो वूल शॉल

मेरिनो वूल शॉल हल्की, गर्म और बेहद आरामदायक होती है. इसे ऑफिस, घर या किसी फंक्शन में आसानी से स्टाइल किया जा सकता है. इसकी खासियत है कि यह एंटी-स्वेट, ब्रीदेबल और बॉडी टेंपरेचर को बैलेंस रखने वाली फैब्रिक से बनती है. यह कई रंगों और डिजाइनों में उपलब्ध होती है. मेरिनो वूल शॉल मुख्य रूप से कश्मीर और हिमाचल में हाथ से बुनी जाती हैं.

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