Google Tag Manager (noscript) -->

इंदिरा से घातक मोदी Emergency – शिव सिंह एड

Spread the love

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे आने के बाद एक बार देश के नागरिकों के मन में यह उम्मीद जगी कि इस बार देश में कुछ अच्छा होगा सरकार में बैठे लोग निरंकुश नहीं होने पाएंगे यही बात लोकसभा स्पीकर के चुनाव तक देखने को भी मिली लोकसभा अध्यक्ष चुने जाने के बाद लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एवं सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने लोकतंत्र के मंदिर लोकसभा में चुनकर आए सदस्यों एवं सदन के अध्यक्ष के लिए उम्दा संदेश दिए जिसकी देशभर में सराहना भी हुई लेकिन जैसे ही सदन की कार्यवाही प्रारंभ हुई स्पीकर ने 49 साल पहले लगी Emergency का प्रस्ताव रख दिया ।

प्रधानमंत्री ने कहा 25 जून 1975 का दिन हम सबके लिए एक काला दिवस था और यह भी कहा कि इंदिरा इमरजेंसी के समय संविधान को कुचला गया वहीं राष्ट्रपति ने लिखित अभिभाषण में 25 जून 1975 की इमरजेंसी का ज़िक्र किया मतलब इन तीनों जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने जिस तरह से लोकतंत्र के मंदिर में बैठकर सदन की शुरुआत कराई देश की खुशहाली के लिए एक अशुभ संकेत है बीजेपी चाहती तो सदन की शुरुआत अच्छे ढंग से हो सकती थी लेकिन छोटे मन के लोगों से बड़ी बातों की उम्मीद करना व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बड़ा दिल दिखाने की अपेक्षा करना बेवकूफी होगी हम तो स्पष्ट कहते हैं कि इंदिरा इमरजेंसी गलत थी

जब Emergency लगी तो विरोध क्यों नहीं किया

वर्तमान कांग्रेस ने भी इस बात को स्वीकार किया है लेकिन प्रधानमंत्री जब 1975 की इंदिरा Emergency में संविधान कुचला जा रहा था उस दौर में आप 25 वर्ष के थे तब आपने इमरजेंसी का विरोध क्यों नहीं किया और यदि किया था तो कितने दिन जेल में रहे और यदि खुलकर सामने नहीं आए भूमिगत आंदोलन चलाए तो ऐसे प्रमाणिक दस्तावेज क्या मौजूद है इन्हीं अहम सवालों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक शिव सिंह एडवोकेट ने कहा कि हमें मोदी सरकार के 10 वर्षों की अघोषित इमरजेंसी को नहीं भूलना चाहिए जिसके प्रमाण इस देश के पास मौजूद है मतलब इंदिरा इमरजेंसी से भी घातक रही मोदी इमरजेंसी मोदी सरकार ने अब फिर से छेड़ ही दिया है तो कुछ सवाल पूछ ही लिए जाए ।

ये भी पढ़ें

किसानों के खिलाफ काले कानून लाकर शहादत के लिए मजबूर करना क्या Emergency नहीं थी

प्रधानमंत्री बताएं किसानों के खिलाफ तीन काले कृषि कानून लाकर उन्हें 13 महीने तक आंदोलन के लिए मजबूर कर दिल्ली की सरहद में छोड़ देना लगभग 750 किसानों को शहादत के लिए मजबूर कर देना लखीमपुर खीरी किसान नरसंहार के मुख्य आरोपी के पिता को गृह राज्य मंत्री बनाए रखना किसानों द्वारा एमएसपी की गारंटी का कानून बनाने की मांग करने पर किसानों को जेल में डालना उनके ऊपर गोली चलवाना उनके लिए कीलें गड़वाना उन पर मुकदमे लगवाना मतलब किसानों के शांतिपूर्ण आंदोलन का क्रूरता पूर्वक दमन करना क्या इमरजेंसी नहीं थी

कोरोना काल में देशभर के लोगों को प्रताड़ित करने उनको कैद में रखना देश भर के मजदूरों को नंगे भूखे पैदल चलने व मरने को मजबूर करना सरकारी योजनाओं को बंद करने की धमकी देकर जबरदस्ती जान को खतरा उत्पन्न करने वाली वैक्सीनेशन कराना क्या यह Emergency नहीं थी एक साथ एक ही सत्र में क़रीब 146 विपक्षी सांसदों को लोक सभा से निलंबित करना विपक्षी सांसदों के माइक बंद करा देना क्या यह एमरजेंसी नहीं थी

स्पीकर द्धारा जय संविधान बोलने पर आपत्ति करना बिना आम राय के CAA भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 भारतीय न्याय संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 पास कराना क्या यह Emergency नहीं थी लोकसभा में 35% विधेयक एक घंटे से कम समय में पारित कराना संसद के प्रांगण से छत्रपति शिवाजी महाराज महात्मा गाँधी और बाबासाहेब की प्रतिमाओं को बिना विपक्ष से चर्चा किये हटवा देना क्या यह इमरजेंसी नहीं थी।

पेपर लीक होना क्या ये इमरजेंसी नहीं – शिव सिंह एड.

विधायकों की नीलामी करके चुनी हुई सरकारें गिराना विपक्ष को ED CBI Income Tax से प्रताड़ित कराना चुनाव के दौरान मुख्यमंत्रियों को जेल में डालना विपक्षी पार्टियों के बैंक खाते बंद कराना विपक्षी नेताओं की न्यायाधीशों की अफ़सरों की अपने ख़ुद के मंत्रियों की पेगसस से जासूसी कराना क्या यह इमरजेंसी नहीं थी एक साल से जलते हुए मणिपुर को उसके हाल पर छोड़ देना चीनी अतिक्रमण से आक्रोशित लद्दाख की अनदेखी करना रोज़गार की माँग करते युवाओं को पुलिस से बर्बर लाठीचार्ज कराना छात्रों को प्रदर्शन करने पर जेल में डाल देना पेपर पर पेपर लीक होना परीक्षाएँ स्थगित होना क्या यह इमरजेंसी नहीं है

21 साल की क्लाइमेट एक्टिविस्ट को गिरफ़्तार करना पत्रकारों पर असहज सच दिखाने के लिए राष्ट्रद्रोह के मुक़दमे लगाना मीडिया को अपने बस में करने के बाद सोशल मीडिया और यूट्यूब पर शिकंजा कसने की कोशिश करना क्या यह इमरजेंसी नहीं है मनमाने फ़रमानों से लॉकडाउन लगाना नोटबंदी करना औरतों के ख़िलाफ़ जघन्य अपराधों पर अपराधियों को संरक्षण देना तथा देशभर की महत्वपूर्ण संस्थाओं को अपने निजी लाभ के लिए पूंजीपतियों उद्योगपतियों को कौड़ी के भाव सौंप देना देश को महंगाई बेरोजगारी भुखमरी गरीबी की ओर ले जाना देश को कर्ज में डुबो देना क्या यह अघोषित Emergency नहीं है l

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *